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Bishesh |
By: डामाडोल डेष्क |
आ...सिर....बाद !आयो यो कलियुगे,श्रीयम् चः ढलिमलि
शत्रु क्षयम् बन्दुके
ऐर्श्वयम् ध्वस्त बने, मति पथभ्रष्ट बने
मानम् चः बुद्धी सुके !
जनता शान्त बने, राष्ट्रियता पिलन्धरे
सत्यम् चः कता लुके !
नेपाल बिगारे, यी नाथेहरुले
जनतालाई धोकै धोके !!
जयन्ती मंगलाकाली, कति काली
राक्षसजस्तो कपाल पालिनि
संस्कृतिमा शिवारात्री
वेष्र्टन कल्चर नमोनमः
सर्वे लथालिङ्ग छरपष्टम्
सर्वे सन्तु मोर्डनम्
सर्वे पप कल्चर पश्चायन्तु
मा कश्चिद नेपालित्व भागवे ।
Author in brief |
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Viewer's Comments
pawan pokhrel writes: Posted on 11/6/2007 | | it's very nice i like so much |
| bibek adhikari,ghyalchok 5 gorkha writes: Posted on 10/25/2007 | | जयन्ती काली हिस्सी परेकी भद्रलाल सिल्की कपालीनी त्यो छाटे एक बित्ते लुगा लगाए कपाल छोडे हातका रीत्तो ब्याग समाए ! श्री दर्ुगानानी लै छोटा लुगा लगाउनेको जाडो भगाए, नमो नमः !!! |
| shree writes: Posted on 10/23/2007 | | verry good i like the bless u have created, monoj bro..continueeee |
| arjun writes: Posted on 10/23/2007 | | kya gajabko aasirbad ho.
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| DP Sharma writes: Posted on 10/18/2007 | | Bishesh jee
Good combination with Sanskrit!
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| raman writes: Posted on 10/17/2007 | | wa khub gsjab lagyo ashirbadta |
| ramesh writes: Posted on 10/17/2007 | | goog achel ko aasirbad tystai hunu par6?
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| dipak writes: Posted on 10/16/2007 | | very good. I like it very much. |
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